अपने इतिहास पर गर्व
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश वासियों के समक्ष पंच प्रण रखे हैं. इनमें अपनी विरासत के प्रति गर्व करना भी है. विरासत में हमारा इतिहास भी सम्मिलित है. प्राचीन काल से शुरू हुआ हमारा इतिहास मध्यकाल से गुज़रता हुआ आधुनिक काल में देश की आजादी के लिए किए गए राष्ट्र नायकों के संघर्ष पर समाप्त होता है. आजादी के बाद का समय भी आधुनिक काल का ही हिस्सा है. प्राचीन काल में रचे गए हमारे वेद, उपनिषद आज भी हमारा मार्गदर्शन और पथ प्रदर्शन करते हैं. श्रीमदभागवत गीता जितना महाभारत काल में प्रासंगिक थी, उससे कहीं ज्यादा आज प्रासंगिक दिखाई देती है. अपनी विरासत पर गर्व करके ही हम आगे आने वाली पीढी से यह अपेक्षा कर सकते है कि वह भी अपनी विरासतों का सम्मान करेगी. देश में प्राकृतिक रूप से परमात्मा ने हमे अनेक धरोहरों से संपन्न बनाया है. हिमालय की बर्फीली और आकाश छूती चोटियां, गंगोत्री-यमुनोत्री और अन्य ग्लेसियर, गंगा-यमुना-कृष्णा-कावेरी जैसी पवित्र और पावन नदियां, हाथी- शेर, गौमाता, ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और भी...