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Showing posts from December, 2022

अपने इतिहास पर गर्व

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश वासियों के समक्ष पंच प्रण रखे हैं.  इनमें अपनी विरासत के प्रति गर्व करना भी है. विरासत में हमारा इतिहास भी सम्मिलित है. प्राचीन काल से शुरू हुआ हमारा इतिहास मध्यकाल से गुज़रता हुआ आधुनिक काल में देश की आजादी के लिए किए गए राष्ट्र नायकों के संघर्ष पर समाप्त होता है. आजादी के बाद का समय भी आधुनिक काल का ही हिस्सा है. प्राचीन काल में रचे गए हमारे वेद, उपनिषद आज भी हमारा मार्गदर्शन और पथ प्रदर्शन करते हैं.  श्रीमदभागवत गीता जितना महाभारत काल में प्रासंगिक थी,  उससे कहीं ज्यादा आज प्रासंगिक दिखाई देती है.      अपनी विरासत पर गर्व करके ही हम आगे आने वाली पीढी से यह अपेक्षा कर सकते है कि वह भी अपनी विरासतों का सम्मान करेगी. देश में प्राकृतिक रूप से  परमात्मा ने हमे अनेक धरोहरों से संपन्न बनाया है.  हिमालय की बर्फीली और आकाश छूती चोटियां,  गंगोत्री-यमुनोत्री और अन्य ग्लेसियर,  गंगा-यमुना-कृष्णा-कावेरी जैसी पवित्र और पावन नदियां,  हाथी- शेर,  गौमाता,  ज्योतिर्लिंग,  शक्तिपीठ और भी...

हार जीत

 क्या हार में क्या जीत में, किन्चित नहीं भयभीत मैं, कवि शिव मंगल सिंह सुमन की यह पंक्तियाँ हमें हार और जीत दोनों को समान रुप से स्वीकार करने की प्रेरणा देती हैं. श्रीमद्भगवद्गीता भी तो अपने निष्काम कर्म से हमे यही प्रेरणा देती हैं कि फल की आकांक्षा रखे बिना ही सदैव कर्मरत रहो. कर्मफल तो कभी विपरित तो कभी अनुकूल रहेगा,  क्या इससे डरकर कर्म करना छोड़ दोगे,  नहीं बिल्कुल नहीं कम से कम मैं तो कभी भी ऐसा नहीं करूंगा.              श्रीमद्भगवद्गीता अपने स्थितप्रज्ञ की अवधारणा से भी यही ज्ञान देती है कि सुख और दुख, सम-विषम किसी भी परिस्थिति में हमे एक भाव रखना चाहिए.  मेरे सामने दो उदाहरण है अभी हाल ही के,  एक फ्रांस की टीम फुटबाल विश्व कप हार गई और उसके महान खिलाड़ी kiliyan Mbape बेहद दुखी नज़र आए, दूसरा आज ही मेरा पुत्र अभ्युदय skating में सिल्वर मेडल जीत कर आया, लेकिन वह अपनी जीत के प्रति समभाव में है.                मैं समझता हूँ कि खेल हो या जिंदगी,  सदैव हमारे अनुकूल नहीं चलती,  अ...